गुरु का ध्यान ही प्रभू का ध्यान है, अगर गुरु का ध्यान कर लिया जाय तो अपने आप ही प्रभू का ध्यान हो जाता है

क्योंकि गुरु परमात्मा ही होता है गुरु और परमात्मा में कोई फर्क नही होता, जब परमेश्वर को याद करने के लिए बैठो तो सतगुरु के सवरूप पर ध्यान टिकाओ ।

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