जिसका अंदर पर्दा खुल जाता है उस जीवात्मा के तेज़ को सह पाना किसी आम इंसान के बस की बात नही होती, 

ये एक मात्र ऐसा परकाश है जो बिन तेल बिन बाती है, जिसकी रोशनी कभी कम नहीं होती, जो निरंतर चलता रहता है और जिसका कोई अंत नहीं है ।
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