जब भी भजन सिमरन पर बैठे तब मालिक के आगे यही अरदास करें कि हे मालिक ! मुझे भजन सिमरन करने का बल बख्शना क्योंकि नाम का अभ्यास ही सतगुरु की सच्ची सेवा है नाम की कमाई के जरिए ही जीव आवागमन के चक्र से छुटकारा पा सकता है नाम के अभ्यासी ही सही मायने में ज्ञानी और विवेकी हैं और नाम के अभ्यास के क़ाबिल वही बनते हैं जिन पर सतगुरु की दया मेहर करता है ।

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