साध संगत जी सतगुरु कहा करते थे कि अगर माली पर विश्वास है तो उससे फूल नहीं मांगना चाहिए बल्कि उसे ही अपना बना लेना चाहिए तो फिर सारा बगीचा ही अपना है
कहने का अर्थ है कि परमात्मा से केवल परमात्मा की ही ख्वाइश करनी चाहिए क्योंकि अगर परमात्मा ही अपना हो गया तो फिर किसी और चीज की ख्वाहिश ही नहीं रहेगी, इसलिए जब भी भजन पर बैठो तो अपने गुरु से केवल यही अरदास करो कि हे सच्चे पातशाह ! हमारा मिलाप मालिक से करवा दे हमारा जन्म मरण का खेल खत्म करवा दें ।
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