एक बार एक सत्संगी ने सतगुरु से पूछा था कि आप रोज़ाना भजन बंदगी के लिए क्यों कहते है तो सतगुरु ने फरमाया था कि रोज-रोज 'भजन-सिमरन' करने से, धीरे-धीरे हमारे अंदर इतनी 'सहनशीलता' आ जाती है, कि हम बिना संतुलन खोए, जीवन में आनेवाले 'उतार-चढ़ाव' का सामना करने लगते हैं हमें इस बात का 'ज्ञान' होने लगता है, कि जो कुछ भी हो रहा है, वह हमारे 'कर्मों' के अनुसार ही हो रहा है और सतगुरु' हमेशा हमारे अंग-संग हैं ।
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